Praveen : rewa to indore

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विचारों की उलझन में फसा हुआ हू मैं ,

जिन्दगी के मायनों को समझने में लगा हुआ हू,

साथ मे चलने का फैसला किया मैने

तेरी शौक थी कि मैं बनू कलम का सिपाही,

बनाऊं एक पुस्तक इस जीवन की

फैसला ही कुछ किया तुमने ऐसा की,

ना trigonometry दिमाक में घूसती,

और ना geometry बाहर निकलती है।।

                
                "CHHOTU"
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