यू ही बीत जाती है रात, कलम पकडे़ पकडे़, न लिख पाते हैं, ना सोचना छोड़ पाते हैं । बस तेरी शरारत ही कुछ ऐसी है, कि शब्द की कमी हो जाती है ॥ ...... @......
 ✍️✍️✍️........ विचारों की उलझन में फसा हुआ हू मैं , जिन्दगी के मायनों को समझने में लगा हुआ हू, साथ मे चलने का फैसला किया मैने तेरी शौक थी कि मैं बनू कलम का सिपाही, बनाऊं एक पुस्तक इ...